दलितों के हक की बुलंद आवाज़ थे रामदास पैंथर, अन्याय के खिलाफ जीवनभर लड़ी लड़ाई
केंद्रीय राज्यमंत्री सामाजिक न्याय श्री रामदास आठवले आज भले ही कुछ लोग उनकी आलोचना करते हों, लेकिन समाज और दलित वर्ग के लिए किए गए उनके संघर्ष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री Ramdas Athawale हमेशा से दलित, शोषित और वंचित समाज की आवाज़ बुलंद करते रहे हैं। कहीं भी दलितों पर अन्याय या अत्याचार की घटना सामने आती थी, तो सबसे पहले “पैंथर” नाम से पहचाने जाने वाले रामदास आठवले पीड़ितों के समर्थन में खड़े दिखाई देते थे। रामदास आठवले ने अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन की शुरुआत संघर्षों के बीच की। समाज में फैले भेदभाव और अन्याय के खिलाफ उन्होंने लगातार आंदोलन किए और दलित समाज के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। उनकी पहचान एक बेबाक और संघर्षशील नेता के रूप में बनी। दलितों के अधिकारों की लड़ाई को संगठित रूप देने के लिए “दलित पैंथर” आंदोलन की स्थापना 29 मई 1972 को महाराष्ट्र में की गई थी। यह आंदोलन नामदेव ढसाल और जे. वी. पवार जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा शुरू किया गया था, जिससे प्रेरित होकर रामदास आठवले ने भी सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई दिशा दी।पहिले दलित पॅंथर कार्यकाल में बहुत अच्छा काम किया अभी की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले पक्ष) अब पी.ई.एस. सोसायटी, औरंगाबाद के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में भी उनके अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में इस नियुक्ति को लेकर खुशी का माहौल है।पहले के Dalit Panthers कार्यकाल में सामाजिक न्याय, दलित अधिकार और अत्याचारों के खिलाफ आंदोलन बहुत मजबूत तरीके से चलाया गया। उस दौर में युवाओं में जोश था और संगठन ने समाज में एक नई जागरूकता पैदा की। आज Republican Party of India (Athawale) भी सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर काम कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Mr.Ramdas Athawale लगातार दलित, वंचित और गरीब समाज के मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हालांकि, कई पुराने कार्यकर्ताओं का मानना है कि जिस तरह का आक्रामक संघर्ष और आंदोलन पहले Dalit Panthers के समय दिखाई देता था, वैसी धार आज की राजनीति में कम देखने को मिलती है। वहीं दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि आज के समय में संगठनात्मक और संवैधानिक तरीके से समाज के लिए काम करना भी उतना ही जरूरी
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