7 माह बाद भी खुलताबाद नगर परिषद पर नहीं लगा त्रिभाषी नामपट्ट, 90 दिनों में निर्णय नहीं हुआ तो हाईकोर्ट जाएंगे : इकबाल पटेल

उपशीर्षक: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा— मराठी के साथ उर्दू व अंग्रेजी में भी लगे नगर परिषद का नामपट्ट खुलताबाद | प्रतिनिधि श्री संजय जाधव. 4/8/2026 खुलताबाद नगर परिषद की नई प्रशासनिक इमारत पर मराठी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा में नामपट्ट (नेम बोर्ड) लगाने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता इकबाल पटेल ने 10 जनवरी 2026 को मुख्याधिकारी को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन दिए जाने के लगभग सात माह बीत जाने के बावजूद नगर परिषद प्रशासन ने इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है। इसे लेकर पटेल ने प्रशासन को 90 दिनों का अंतिम समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में भी निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दायर करेंगे। पटेल ने बताया कि खुलताबाद एक ऐतिहासिक, धार्मिक तथा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, जहां प्रतिदिन विभिन्न भाषाई समुदायों के लोग और देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। पहले नगर परिषद भवन पर मराठी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में नामपट्ट लगा हुआ था, लेकिन नई प्रशासनिक इमारत बनने के बाद उसे दोबारा नहीं लगाया गया। इससे स्थानीय नागरिकों और बाहर से आने वाले पर्यटकों को भवन की पहचान करने में कठिनाई हो रही है। सोमवार (3 अगस्त) को मीडिया से बातचीत के दौरान पटेल ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के अकोला जिले की पातूर नगर परिषद के नामपट्ट पर उर्दू भाषा के उपयोग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मराठी के साथ अतिरिक्त भाषा के रूप में उर्दू का उपयोग किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा है कि भाषा संवाद का माध्यम है तथा महाराष्ट्र स्थानीय प्राधिकरण (राजभाषा) अधिनियम, 2022 अतिरिक्त भाषा में नामपट्ट लगाने पर कोई रोक नहीं लगाता। पटेल ने मांग की है कि नगर परिषद की नई प्रशासनिक इमारत पर पहले की तरह मराठी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में नामपट्ट तत्काल लगाया जाए तथा इसे मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रमुख स्थान पर स्थापित किया जाए, ताकि सभी नागरिकों और पर्यटकों को सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यदि आगामी 90 दिनों के भीतर भी नगर परिषद इस संबंध में सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दायर कर न्याय की मांग की जाएगी। इस अवसर पर पटेल ने कहा कि उर्दू केवल किसी एक समुदाय की भाषा नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की साझा सांस्कृतिक विरासत और संवाद की भाषा है। इसे मुसलमानों ने अवश्य अपनाया है, लेकिन यह पूरे देश की भाषा है और सभी नागरिकों को इसका सम्मान करना चाहिए।

Aug 4, 2026 - 14:00
 0
Trilingual nameplate not installed on Khuldabad Municipal Council even after 7 months, if decision is not taken in 90 days then will go to High Court: Iqbal Patel
1 / 2

1. Trilingual nameplate not installed on Khuldabad Municipal Council even after 7 months, if decision is not taken in 90 days then will go to High Court: Iqbal Patel

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow