शिकायतों पर 7 कार्य दिवसों में कार्रवाई अनिवार्य हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद महाराष्ट्र शासन सख्त; जिला परिषद अधिकारियों को निर्देश, लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई के साथ BNS के तहत आपराधिक कार्रवाई की संभावना

खुल्दाबाद /रिपोर्टर श्री संजय जाधवे 10 अगस्त 2026 जिला परिषदों में प्राप्त शिकायतों, निवेदनों तथा कर्मचारियों-शिक्षकों से संबंधित लंबित मामलों को लेकर महाराष्ट्र शासन के ग्राम विकास विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। माननीय उच्च न्यायालय, नागपुर द्वारा 27 जुलाई 2026 को दिए गए निर्देशों के बाद शासन ने सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) एवं संबंधित अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। ग्राम विकास विभाग के सचिव डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार द्वारा 3 अगस्त 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिला परिषद एवं पंचायत समिति स्तर पर प्राप्त विभिन्न निवेदनों और शिकायतों को तत्काल संज्ञान में लेकर निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई की जाए। 7 कार्य दिवसों में कार्रवाई का निर्देश शासन ने निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों को प्राप्त निवेदन एवं शिकायतों पर सात कार्य दिवसों के भीतर कार्रवाई की जाए। मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। तबादले से जुड़ी शिकायतों का तत्काल निपटारा जिला परिषद के कर्मचारियों और शिक्षकों के तबादलों से संबंधित लंबित शिकायतों एवं निवेदनों का गुणवत्तापूर्ण और तत्काल निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन का मानना है कि समय पर निर्णय लेने से अनावश्यक न्यायालयीन मामलों की संख्या कम की जा सकेगी। हाईकोर्ट में लंबित मामलों में शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश मुंबई, औरंगाबाद तथा नागपुर स्थित उच्च न्यायालय में तबादले से संबंधित याचिकाएं दाखिल करने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों के मामलों में वस्तुस्थिति स्पष्ट करने वाला शपथपत्र और आवश्यक जानकारी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई शासकीय कामकाज में जानबूझकर या लापरवाही के कारण देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। संबंधित अधिकारी की गोपनीय रिपोर्ट में भी उचित टिप्पणी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। गलत रिपोर्ट या जानबूझकर कार्रवाई न करने पर BNS की धाराएं भी विचाराधीन यदि किसी मामले में कोई लोक सेवक जानबूझकर कानून/वैध निर्देश की अवहेलना करता है और इससे किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति उत्पन्न होती है, तो तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 लागू होने का प्रश्न उठ सकता है। इस धारा में ऐसे लोक सेवक के लिए सजा का प्रावधान है। इसी प्रकार, यदि किसी अधिकारी द्वारा जानबूझकर गलत सरकारी रिकॉर्ड या दस्तावेज तैयार किया जाता है और उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना या किसी को कानूनी कार्रवाई/दंड से बचाना है, तो मामले के तथ्यों के अनुसार BNS की धारा 201 अथवा धारा 256 जैसी धाराओं की जांच की जा सकती है। यदि किसी अधिकारी द्वारा कानून की अवहेलना करके किसी व्यक्ति को कानूनी दंड से बचाने का जानबूझकर प्रयास किया जाता है, तो BNS की धारा 255 भी परिस्थितियों के अनुसार प्रासंगिक हो सकती है। हालांकि, सिर्फ शिकायत लंबित रहने या प्रशासनिक लापरवाही होने मात्र से FIR स्वतः दर्ज नहीं होती। आपराधिक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारी की मंशा, कृत्य, नुकसान तथा उपलब्ध दस्तावेजी/अन्य साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी। हर सोमवार होगी समीक्षा शासन ने सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिला परिषद स्तर पर हर सोमवार को मामलों की समीक्षा की जाए। इसी प्रकार पंचायत समिति स्तर पर गट विकास अधिकारियों द्वारा भी प्रत्येक सोमवार को समीक्षा की जाएगी। 8 दिनों में शासन को अनुपालन रिपोर्ट इन सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने की जिम्मेदारी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की रहेगी। शासन ने निर्देश दिया है कि कार्रवाई पूरी कर 8 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की जाए। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन पर बढ़ी जिम्मेदारी हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद जारी यह शासन निर्देश जिला परिषदों में लंबित शिकायतों एवं आवेदनों के त्वरित निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब यदि किसी अधिकारी द्वारा शासन के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना, गलत सरकारी रिपोर्ट अथवा गलत रिकॉर्ड तैयार करने जैसे गंभीर कृत्य किए जाते हैं, तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ लागू कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई की संभावना भी जांच के दायरे में आ सकती है। नोट: मैंने BNS की धाराओं को “लागू होगी” के बजाय “तथ्यों के आधार पर लागू होने की संभावना/जांच” के रूप में रखा है। इससे अखबार की खबर कानूनी रूप से अधिक सुरक्षित रहेगी।BNS की धारा 198 लोक सेवक द्वारा कानून के निर्देश की जानबूझकर अवहेलना कर किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति से संबंधित है; धारा 201 गलत दस्तावेज तैयार कर नुकसान पहुंचाने की स्थिति से संबंधित है; और धारा 255/256 किसी व्यक्ति को कानूनी दंड से बचाने के उद्देश्य से कानून की अवहेलना या गलत रिकॉर्ड तैयार करने से संबंधित हैं। � India Code +1

Aug 10, 2026 - 23:34
Aug 10, 2026 - 23:35
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शिकायतों पर 7 कार्य दिवसों में कार्रवाई अनिवार्य हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद महाराष्ट्र शासन सख्त; जिला परिषद अधिकारियों को निर्देश, लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई के साथ BNS के तहत आपराधिक कार्रवाई की संभावना
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