जिलाधिकारी के खिलाफ न्यायालय जाने की तैयारी में समाजसेवी इकबाल पटेल
नगर परिषद या ग्राम पंचायत? खुलताबाद में फिर छिड़ी बहस जिलाधिकारी के खिलाफ न्यायालय जाने की तैयारी में समाजसेवी इकबाल पटेल खुलताबाद | 14 अक्टूबर | प्रतिनिधि खुलताबाद नगर परिषद की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। आय बेहद सीमित और खर्चे कई गुना अधिक होने से हर वर्ष सरकार को करोड़ों रुपये का घाटा झेलना पड़ता है। इसी पृष्ठभूमि में एक बार फिर खुलताबाद नगर परिषद को भंग कर सुलिभंजन ग्राम पंचायत में विलय करने की मांग ने जोर पकड़ा है। इस विषय को लेकर स्थानीय समाजसेवी इकबाल पटेल ने पहले ही 15 सितंबर 2021 को राज्य के मुख्य सचिव और राज्य चुनाव आयोग को पत्र भेजकर नगर परिषद के ग्राम पंचायत में विलय की मांग की थी। उनका कहना है कि नगर परिषद के पास कोई ठोस आय स्रोत नहीं है, जबकि खर्चों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि नगर परिषद की कुल जनसंख्या 15,749 होने के बावजूद, विकास निधि का बड़ा हिस्सा राजनीतिक खींचतान और ठेका विवादों में उलझ जाता है। नगराध्यक्ष, उपनगराध्यक्ष और नगरसेवकों के बीच हिस्सेदारी के विवाद के चलते अधिकांश योजनाएँ अधूरी पड़ी हैं। भौगोलिक दृष्टि से भी नगर परिषद की स्थिति सीमित आय वाली बताई जाती है — उत्तर में सुलिभंजन ग्राम पंचायत, दक्षिण में म्हैसमाल रोड और दरगाह कब्रिस्तान, पश्चिम में एलोरा घाट का वन विभाग क्षेत्र तथा पूर्व में कृषि भूमि होने से कोई नया राजस्व स्रोत विकसित नहीं हो पा रहा है। नगर परिषद में इस समय करीब 50 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से आधे सफाई और आधे जलापूर्ति से जुड़े हैं। बावजूद इसके नागरिकों को नियमित स्वच्छता और पानी की आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। केवल कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन पर ही सरकार को हर माह लाखों रुपये का खर्च वहन करना पड़ता है। इकबाल पटेल का कहना है कि यदि खुलताबाद नगर परिषद को सुलिभंजन ग्राम पंचायत (जनसंख्या लगभग 2,200) में विलय किया जाए, तो शासन को बड़ी आर्थिक बचत होगी और प्रशासनिक कार्य अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकेंगे। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर राज्य चुनाव आयोग ने 18 फरवरी 2022 को तत्कालीन जिलाधिकारी आस्तिक कुमार पांडे को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे, लेकिन आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। अब इकबाल पटेल ने घोषणा की है कि वे नगर परिषद चुनाव समाप्त होते ही जिलाधिकारी के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर करेंगे। उनका कहना है— जब नगर परिषद जनता पर बोझ बन चुकी है और विकास कार्य ठप हैं, तो उसे ग्राम पंचायत में मिलाना ही जनता और शासन दोनों के हित में है। ज्ञात हो कि 2022 में नगर परिषद के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसे स्थगित कर दिया गया था। वहीं, अब राज्य सरकार ने 8 अक्टूबर 2025 को स्थानीय निकाय चुनावों को हरी झंडी दे दी है और आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर ली है। ऐसे में नगर परिषद को ग्राम पंचायत में मिलाने का मुद्दा फिर से गरमा गया है, और खुलताबाद में यह विषय चर्चा का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
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